मंगलवार, 8 अक्टूबर 2013

जो भूल जाये धर्म को वो 
धर्मदूत हो नहीँ सकता।
जो भूल जाये गजनी की
धूर्तता को वो राजपूत हो
नहीँ सकता॥

राजपुत अगर हो तो 
क्षत्रिय धर्म मे रहना 
जरुरी हैँ।
खून मे हे रजपूती तो 
क्षत्रिय धर्म को महान
कहना जरुरी हैँ॥

आज कोशिस हो रही
क्षत्रिय धर्म को भुलाने की।
जो हकदार है सिँहासन के
उन्है छोङ अधर्मियोँ को
बुलाने की॥

आज हमे जरुरत है
क्षत्रिय धर्म और सँस्कारो
को अपनाने की ।
राणा वाली रजपूती है
अभी भी कायम दुनियाँ
को ये बतलाने की 

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