जो भूल जाये धर्म को वो
धर्मदूत हो नहीँ सकता।
जो भूल जाये गजनी की
धूर्तता को वो राजपूत हो
नहीँ सकता॥
राजपुत अगर हो तो
क्षत्रिय धर्म मे रहना
जरुरी हैँ।
खून मे हे रजपूती तो
क्षत्रिय धर्म को महान
कहना जरुरी हैँ॥
आज कोशिस हो रही
क्षत्रिय धर्म को भुलाने की।
जो हकदार है सिँहासन के
उन्है छोङ अधर्मियोँ को
बुलाने की॥
आज हमे जरुरत है
क्षत्रिय धर्म और सँस्कारो
को अपनाने की ।
राणा वाली रजपूती है
अभी भी कायम दुनियाँ
को ये बतलाने की
धर्मदूत हो नहीँ सकता।
जो भूल जाये गजनी की
धूर्तता को वो राजपूत हो
नहीँ सकता॥
राजपुत अगर हो तो
क्षत्रिय धर्म मे रहना
जरुरी हैँ।
खून मे हे रजपूती तो
क्षत्रिय धर्म को महान
कहना जरुरी हैँ॥
आज कोशिस हो रही
क्षत्रिय धर्म को भुलाने की।
जो हकदार है सिँहासन के
उन्है छोङ अधर्मियोँ को
बुलाने की॥
आज हमे जरुरत है
क्षत्रिय धर्म और सँस्कारो
को अपनाने की ।
राणा वाली रजपूती है
अभी भी कायम दुनियाँ
को ये बतलाने की
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें