गुरुवार, 1 अगस्त 2013

॥कङवी सच्चाई॥
क्षत्रिय मित्रो कहते है, की जब बारिश होती है तो जो बादल हवा के विपरीत दिशा मे चलता है, वो ही मुशलाधार बरसता है, और जो हवा के साथ चलता है उसको हवा बिखेर देती है। और वो बादल एक बुन्द भी नहीँ गिरा सकता। आज ठीक यही स्थिती क्षत्रिय समाज की है जो समय के साथ हो लिया है और समय के फेर ने हमे पुरी तरह से बिखेर दिया है।

वरना एक समय था जब पूरी पृथ्वी पर क्षत्रियो का राज था। गँगाजी को धरती पे लाने का और ईस धरती को पापीयो से मुक्त करने का श्रेय भी क्षत्रियो को ही जाता है।क्योकि उस समय भागीरथ जैसे दृड्ढ निश्चियी और तपसवी क्षत्रिय हुए जिन्है ईँद्र की अपसराए तक विचलित नही कर सकी थी और वो भागीरथी गँगा को धरती पर ले आये थे।
परन्तु आज मुजे बङे अपसोस के साथ लिखना पङ रहा है की उन्ही भागीरथ के वँशज क्षत्रियो के बारे मे लोगो की धारणा है की ये तो राजपूत है एक बोतल मे काम हो जायेगा, एक बोतल पीला दो लङाई कर लेगा परीणाम चाहै जो भी हो। बताओ साथीयो क्या ये भागीरथ,मर्यादापुरुषोतम राम,महाराणा प्रताप,दुर्गादास और सत्यवादी हरिश्चन्द्र के वँशजो के लक्षण है।
अरे जिन्है तीन लोक का राज्य भी नहीँ बदल सकता था उन्हे एक गिलास गँदा पानी बदल रहा है कितनी शर्म की बात है।

मे ये नही कहता की सभी राजपूत एसे होते है आज समाज के लिये मरने वालो और क्षत्रिय धर्म के अनुशार चलने वालो की भी कमी नही है परन्तु साथीयो एक सङा सेब पुरी टोकरी को सङा सकता है।
इसिलिये क्षत्रिय साथियो समय के साथ ना चलके समय को अपने साथ चलायेँ और अपने गौरवमयी ईतिहास का सदा स्मरण रखे और कीसी भी परिस्थिती मे अपने ईतिहास को कलँक लगे एसा काम ना करे और ना होने दे।
जिस शराब ने हमारे समाज को गर्त मे धकेला है उसका परित्याग करे और सभी प्रकार की बुराइयो से दुर रह के क्षत्रिय धर्म का पालन करै फिर ईस दुनिया मे राम राज्य को आने से कोई रोक नहीँ सकता।
क्षत्रिय धर्म के पालन के कारण ही तो कहा गया है

रघूकुल रीत सदा चली आई।
प्राण जाये पर वचन ना जाई॥
जय क्षत्रिय एकता॥
जय क्षात्र धर्म॥
हरिनारायण सिँह राठौङ
 

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