कङवी बात॥
ये बात 16 आना सच है की राजपूत महान है,थे और रहैँगे हम एसा कहते रहे, अपने समाज मे तलवार की गाथा गाते रहै और बाहर से कुछ मुठ्ठी भर मुल्ले आये घोङो पे छढ के और हमारा भारत हमसे छीन लिया और हम हमारी गाथा गाते रहै।
ये भी सत्य है की उन्होने कई बार मूँह की खाई पर "करत करत अभ्यास के जङ मत होत सुजान" के भाव से लगे रहै और सफल भी हो गये और हम महानता को लिये बेठे रहै। क्यो की उन्होने जान लिया था कि सीधी लङाई मे हमे हराना आसान नही है तो आपस मे लङाया छोटा मोटा बनाया। कुछ को अपने साथ रखा और कुछ को सामने। और ये सिलसिला 1000 साल स अनवरत जारी है।
आदमी एक बार ठोकर खा जाये तो सुधर जाता है परन्तू क्षत्रिय 1000 ठोकरे लगने के बावजूद आज तक नही सुधरा है और आज भी ये राजनितिक लोग अपने फायदे के लिये हमे स्तेमाल करते है और हम जिस डाल पे बेठै है उसी को काट रहै है।
हम महान थे,है पर आगे कैसे रहैगे ईसके बारे मे सोचना है।महान महान कहने से कोई महान नही बनता उसके लिये महाराणा के जैसे तपना पङता है।महाराणा की जय हम रोज बोलते है परन्तु उनके जैसा बनने की कोसिस कोई नही करता।और कोई विरला हिम्मत कर भी ले तो हजारौ आ जाएँगे टाँग खीचने के लिये।आज सबको लीडर बनना है।ठीक उसी प्रकार हमारे को दबाने को अगर कोई आवाज उठती है तो हजारो आ जाएँगे उनके साथ इस बात को क्षत्रिय समाज समज नही रहा है।
साथियोँ हमे इस बात को समजना पङेगा कि जिस सँस्कृती और गौरव को बचाने के लिये लाखो क्षत्रियो ने कुर्बानीया दी, लाखोँ क्षत्राणियो ने अपने आप को आग के हवाले कर दिया आज वो समाज और सँस्कृती खतरे मे है और हम युवाओ को इसके लिये आगे आना पङेगा। साथियो हम जय राजपुताना का नारा तो लगाते है पर इसके साथ साथ हमे हमारी कमीयो को भी स्वीकार करना पङेगा।और हमे सिर्फ क्षत्रिय की बात करने के बजाय सबको साथ लेके चलने की बात करे। क्योकी ये ही हमारी परँपरा है।औय सदीयो से चली आ रही है।क्षत्रियो ने पुरे विश्व का नेत्रत्व किया है, एक छत्र राज करने का गौरव भी क्षत्रियौ को प्राप्त है। भारत विश्व गुरु और सोने की चिङिया क्षत्रियो के शाषन मे ही रहा है।और हमे अपने प्रयासो सै पुन: उस गौरव को पाना है
ना तो कोई छोटा ना कोई बङा है।
हर एक अपने भारत के लिये लङा है॥
आज फिर अपने वतन को हमारी जरुरत पङी है।
भष्ट्रो की सेना देखो सामने तन के खङी है॥
जय क्षत्रिय एकता॥
जय क्षत्रिय॥
हरिनारायण सिँह राठौङ
ये बात 16 आना सच है की राजपूत महान है,थे और रहैँगे हम एसा कहते रहे, अपने समाज मे तलवार की गाथा गाते रहै और बाहर से कुछ मुठ्ठी भर मुल्ले आये घोङो पे छढ के और हमारा भारत हमसे छीन लिया और हम हमारी गाथा गाते रहै।
ये भी सत्य है की उन्होने कई बार मूँह की खाई पर "करत करत अभ्यास के जङ मत होत सुजान" के भाव से लगे रहै और सफल भी हो गये और हम महानता को लिये बेठे रहै। क्यो की उन्होने जान लिया था कि सीधी लङाई मे हमे हराना आसान नही है तो आपस मे लङाया छोटा मोटा बनाया। कुछ को अपने साथ रखा और कुछ को सामने। और ये सिलसिला 1000 साल स अनवरत जारी है।
आदमी एक बार ठोकर खा जाये तो सुधर जाता है परन्तू क्षत्रिय 1000 ठोकरे लगने के बावजूद आज तक नही सुधरा है और आज भी ये राजनितिक लोग अपने फायदे के लिये हमे स्तेमाल करते है और हम जिस डाल पे बेठै है उसी को काट रहै है।
हम महान थे,है पर आगे कैसे रहैगे ईसके बारे मे सोचना है।महान महान कहने से कोई महान नही बनता उसके लिये महाराणा के जैसे तपना पङता है।महाराणा की जय हम रोज बोलते है परन्तु उनके जैसा बनने की कोसिस कोई नही करता।और कोई विरला हिम्मत कर भी ले तो हजारौ आ जाएँगे टाँग खीचने के लिये।आज सबको लीडर बनना है।ठीक उसी प्रकार हमारे को दबाने को अगर कोई आवाज उठती है तो हजारो आ जाएँगे उनके साथ इस बात को क्षत्रिय समाज समज नही रहा है।
साथियोँ हमे इस बात को समजना पङेगा कि जिस सँस्कृती और गौरव को बचाने के लिये लाखो क्षत्रियो ने कुर्बानीया दी, लाखोँ क्षत्राणियो ने अपने आप को आग के हवाले कर दिया आज वो समाज और सँस्कृती खतरे मे है और हम युवाओ को इसके लिये आगे आना पङेगा। साथियो हम जय राजपुताना का नारा तो लगाते है पर इसके साथ साथ हमे हमारी कमीयो को भी स्वीकार करना पङेगा।और हमे सिर्फ क्षत्रिय की बात करने के बजाय सबको साथ लेके चलने की बात करे। क्योकी ये ही हमारी परँपरा है।औय सदीयो से चली आ रही है।क्षत्रियो ने पुरे विश्व का नेत्रत्व किया है, एक छत्र राज करने का गौरव भी क्षत्रियौ को प्राप्त है। भारत विश्व गुरु और सोने की चिङिया क्षत्रियो के शाषन मे ही रहा है।और हमे अपने प्रयासो सै पुन: उस गौरव को पाना है
ना तो कोई छोटा ना कोई बङा है।
हर एक अपने भारत के लिये लङा है॥
आज फिर अपने वतन को हमारी जरुरत पङी है।
भष्ट्रो की सेना देखो सामने तन के खङी है॥
जय क्षत्रिय एकता॥
जय क्षत्रिय॥
हरिनारायण सिँह राठौङ
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