क्षत्रियोँ की जरुरत-समय के साथ बदलाव।
जय क्षत्रिय एकता॥
जय क्षत्रिय॥
साथियो आज हमे ये सोचने की जरुरत है की आज हमारी एसी कोनसी कमिया है जिनकी वजह से आज हम लोग पिछङ रहै है। एक समय था जब क्षत्रियोँ का धरती पे भगवान के बाद दुसरा स्थान था। उसका कारण ये था की उस समय क्षत्रिय अपने धर्म और अपने कर्म के प्रती निष्ठा रखता था।ओर लोग भी हमे पुरा आदर देते थे।अपनी जान पे खेल के भी शरणागत की रक्षा करना प्रजा को बेटे से भी ज्यादा तरजीह देना अपना कर्त्तव्य था।
तलवार हमारा प्रीय आभुषण हूआ करती थी।परन्तू अब जमाना पुरी तरह बदल चुका है, अब हमे तलवार की जरुरत नहीँ है बदलाव की जरुरत है।समय के साथ ना बदलकर ही तो हमने बहुत धोका खाया है, हमारे राजाओ ने बन्दुको और तोपो का सामना तलवारो से किया फिर भी उन्होने दुश्मन को नानी याद दिला दी ,जरा सोचे साथीयो अगर उस समय महाराणा के पास अकबर के जैसा तोपखाना हो तो अकबर भारत मे नहीँ टिक सकता था।
पहले हम हर क्षेत्र मे पारँगत होते थे ओर आज भी हमे हर क्षेत्र मे आगे रहना पङेगा तभी हम अपने समाज के अस्तित्व को बचा पायेँगे।साथियो पहले हमारा मुकाबला तोपो और बन्दुको से था जो हमने समय के साथ ना बदलकर हार दिया।परन्तु साथीयो आज हमारा मुकाबला इस आरक्षण और राजनेतिक व्यवस्था से है जिसमे हम आज तक तो पिछङ रहै है।राजनीति मे पिछङने एक ही कारण है की हमे चमचागिरी और चापलुसी करना नहीँ आता, और वो हमारे खून मे भी नहीँ है।परन्तु साथियोँ हमारे पास जो जुबान है जिस राजपुती बोली और अपणायत की दुनिया कायल है सबको साथ लेके चलने की ताकत जो हजारो वर्षो से हमारे खून मे है उसे अपना कर हमे समय के साथ चलना होगा।
मित्रो आज हमे इस समय की माँग के अनुशार समय की बारीकियो और चालाकीयो को सीखना होगा।आज हमारा दुर्भाग्य है की बेशाखीयो का सहारा ले के चलने वाले हम तलवार की धार पे चलने वालो को पछाङ रहै है। साथीयो जो बेल कीसी के सहारे से चलती हे वो छाया तो गहरी कर सकती है परन्तू जो पेङ खुद के तने के सहारे खङा होता है उसका मुकाबला नहीँ कर सकती है,साथीयो समज जाइये।
हमारे पुर्वजो ने जो आधार स्तम्ब हमे दिया है हम उसके अनुशार चलेँ ओर अपनी एकता को बरकार रखेँ,तो मित्रो हमे जमाने की कोई भी आँधी हिला नहीँ सकती है।
भाईयो हमे समय की माँग को स्वीकार करते हुए अपनी एकता को बनाये रखना है और समय के बदलाव को स्वीकार करना है।
जय क्षात्र धर्म॥
हरिनारायण सिँह राठौङ
जय क्षत्रिय एकता॥
जय क्षत्रिय॥
साथियो आज हमे ये सोचने की जरुरत है की आज हमारी एसी कोनसी कमिया है जिनकी वजह से आज हम लोग पिछङ रहै है। एक समय था जब क्षत्रियोँ का धरती पे भगवान के बाद दुसरा स्थान था। उसका कारण ये था की उस समय क्षत्रिय अपने धर्म और अपने कर्म के प्रती निष्ठा रखता था।ओर लोग भी हमे पुरा आदर देते थे।अपनी जान पे खेल के भी शरणागत की रक्षा करना प्रजा को बेटे से भी ज्यादा तरजीह देना अपना कर्त्तव्य था।
तलवार हमारा प्रीय आभुषण हूआ करती थी।परन्तू अब जमाना पुरी तरह बदल चुका है, अब हमे तलवार की जरुरत नहीँ है बदलाव की जरुरत है।समय के साथ ना बदलकर ही तो हमने बहुत धोका खाया है, हमारे राजाओ ने बन्दुको और तोपो का सामना तलवारो से किया फिर भी उन्होने दुश्मन को नानी याद दिला दी ,जरा सोचे साथीयो अगर उस समय महाराणा के पास अकबर के जैसा तोपखाना हो तो अकबर भारत मे नहीँ टिक सकता था।
पहले हम हर क्षेत्र मे पारँगत होते थे ओर आज भी हमे हर क्षेत्र मे आगे रहना पङेगा तभी हम अपने समाज के अस्तित्व को बचा पायेँगे।साथियो पहले हमारा मुकाबला तोपो और बन्दुको से था जो हमने समय के साथ ना बदलकर हार दिया।परन्तु साथीयो आज हमारा मुकाबला इस आरक्षण और राजनेतिक व्यवस्था से है जिसमे हम आज तक तो पिछङ रहै है।राजनीति मे पिछङने एक ही कारण है की हमे चमचागिरी और चापलुसी करना नहीँ आता, और वो हमारे खून मे भी नहीँ है।परन्तु साथियोँ हमारे पास जो जुबान है जिस राजपुती बोली और अपणायत की दुनिया कायल है सबको साथ लेके चलने की ताकत जो हजारो वर्षो से हमारे खून मे है उसे अपना कर हमे समय के साथ चलना होगा।
मित्रो आज हमे इस समय की माँग के अनुशार समय की बारीकियो और चालाकीयो को सीखना होगा।आज हमारा दुर्भाग्य है की बेशाखीयो का सहारा ले के चलने वाले हम तलवार की धार पे चलने वालो को पछाङ रहै है। साथीयो जो बेल कीसी के सहारे से चलती हे वो छाया तो गहरी कर सकती है परन्तू जो पेङ खुद के तने के सहारे खङा होता है उसका मुकाबला नहीँ कर सकती है,साथीयो समज जाइये।
हमारे पुर्वजो ने जो आधार स्तम्ब हमे दिया है हम उसके अनुशार चलेँ ओर अपनी एकता को बरकार रखेँ,तो मित्रो हमे जमाने की कोई भी आँधी हिला नहीँ सकती है।
भाईयो हमे समय की माँग को स्वीकार करते हुए अपनी एकता को बनाये रखना है और समय के बदलाव को स्वीकार करना है।
जय क्षात्र धर्म॥
हरिनारायण सिँह राठौङ
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